**तितली और मेंढ़ा**
बहुत समय पहले की बात है, एक सुंदर सा फूल खिला था.
इस फूल पर एक छोटी सी तितली बसी थी वह बहुत ही खुश थी और फूल के साथ खेलती रहती थी.
एक दिन, तितली ने एक मेंढ़ा को देखा. मेंढ़ा बड़ा दहाड़ रहा था और तितली के पास आया.
मेंढ़ा ने कहा, "तुम मेरी खूबसूरती को देखकर हैरान हो रही होगी, तितली!"
तितली हँसी में बोली, "नहीं, मेंढ़ा भैया, हर किसी की अलग-अलग खूबसूरती होती है."
मेंढ़ा हैरान होकर पूछा, "तुम इतनी छोटी क्यों हो? तुम्हें ज्यादा ऊचाई हासिल करनी चाहिए."
तितली ने मुस्कराते हुए कहा, "मैं छोटी हूँ, पर मेरी खुशी बहुत बड़ी है.
हर किसी की अपनी अहमियत होती है."
मेंढ़ा ने समझा कि खुद को कोई बड़ा या छोटा नहीं कह सकता, और उसने तितली की समझ को स्वीकार किया.
इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें हमेशा खुद को ऐसा महसूस करने की कोशिश करनी चाहिए कि हम किसी से कम नहीं हैं, और हमें खुद को खुश रखना चाहिए.
यह एक छोटी सी कहानी है, जो बच्चों को समझदार बनाने में मदद कर सकती है।
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